काणी का बटेऊ / Kaani Ka Bateu – Rajesh Singhpuriya

Kaani Ka Bateu Lyrics is a Haryanvi song sung by Rajesh singhpuriya. Lyrics of Kaani Ka Bateu song are written by Rajesh Singhpuriya. Music label is ViaNet Dehati. Enjoy song Kani Ka Bateu Lyrics.

Song – Kaani Ka Bateu
Singer – Rajesh Singhpuriya
Lyrics – Rajesh Singhpuriya
Label – ViaNet Dehati

Kaani Ka Bateu Lyrics in Hindi


माहरी छोरी की किस्मत तै फोड़ दी
माहरी छोरी की किस्मत तै फोड़ दी
हाय काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
हाय काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी

रै भरी होई बोतल की घेटी तोड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी

(संगीत)

जब वो पीकै आया करता
सेब संतरे ल्याया करता
मुर्गा भी बणवाया करता
खुल्ले नोट उड़ाया करता

जब वो पीकै आया करता
सेब संतरे ल्याया करता
मुर्गा भी बणवाया करता
खुल्ले नोट उड़ाया करता

जब तै उसनै छोड्या पीणा
आलू गंठे खावै कमीणा
टेम तै पहला नै आले
छोरी का होया मुश्किल जीणा

एक एक पीसा देता रोवै
कपडे भी बिन साबण धोवै
शक्की नजर मेरे पै राखै
रात नै जागै दिन म सोवै

देखो छोरी की आंगली मरोड़ दी
मरोड़ दी, मरोड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
फलाणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी

(संगीत)

जिसनै समझो सो थम काणी
उसनै लाग्या करती राणी
जब तै पेग लगाणे छोड़े
या दिखै सै गोबर खाणी

जिसनै समझो सो थम काणी
उसनै लाग्या करती राणी
जब तै पेग लगाणे छोड़े
या दिखै सै गोबर खाणी

वो तो पीकै पड़ ज्यावै था
सारा माल मेरै थ्यावै था
मैं रोज लेउँ थी झाड़ा
इब लगता कोन्या दाड़ा

छः महीना पहल्या माहरी काणी काचे काटै थी
राज करै थी पीहर म आवण तै नाटै थी
हो काचे काटै थी, हो काचे काटै थी
छः महीना पहल्या माहरी काणी काचे काटै थी
राज करै थी पीहर म आवण तै नाटै थी

इब गच्छा के होगे तोड़े
इसके छूटगे चाट पकोड़े
जब जब दीखै वो सोफी म
इसकै लगज्या तुरंत मरोड़े

हाय ख़ुशी मेरी ज़िन्दगी तै कती निचोड़ दी
निचोड़ दी, निचोड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
फलाणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी

(संगीत)

पाड़ कै अपणा नया पजामा
ईब करेगा कौन ड्रामा
कुत्ते न्यूए बाट देखैंगे
कद आवैगा माहरा मामा

पाड़ कै अपणा नया पजामा
ईब करेगा कौन ड्रामा
कुत्ते न्यूए बाट देखैंगे
कद आवैगा माहरा मामा

गाल दिया करती या भुंडी
पर उनै ठाई ना कदे मुंडी
टप तप आँसू न्यू गेरै सै
गुठी देख कै रोवै टुंडी

गाल दिया करती या भुंडी
पर उनै ठाई ना कदे मुंडी
टप तप आँसू न्यू गेरै सै
गुठी देख कै रोवै टुंडी

बेबे चाला घणा पाट ग्या
मोटी पर्ची माहरी काट ग्या
जो पीकै पाँच लाख लेग्या था
उन नै साफ़ नाट ग्या

सिंघपुरिये दिल न्यू घबरावै
पीये बिन उकै याद ना आवै
वो नेम पीण का ठा ग्या
कुण हटकै शुरू करावै

कित ल्याकै नै कित की बात घसौड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
फलाणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
काणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी
फलाणी के बटेऊ नै दारू छोड़ दी

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